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उल्लास का उत्सव भगोरिया मेला

भगोरिया मेला प्रदेश के झाबुआ, आलीराजपुर, खरगौन, बड़वानी और धार के भील, भिलाला और बारेला जनजाति द्वारा होली से सात दिन पहले मनाया जाने वाला सात दिवसीय प्रसिद्ध जनजातीय उत्सव है। फसल कटाई का जश्न होली के सात दिन पहले शुरू होने वाला यह मेला, फसल कटाई के बाद जनजातीय समुदाय द्वारा उल्लास के साथ मनाए जाने वाला का त्यौहार है। भगोरिया में रंग-गुलाल लगाने, नृत्य-संगीत और खरीदारी करने की उदात्त भावनाएँ मुखरता से प्रदर्शित होती है।

फागुन महीने में जब चारों ओर प्रकृति में नया उल्लास होता हैं तब पश्चिम निमाड़ से झाबुआ तक के जनजातीय क्षेत्रों के साप्ताहिक हाट बाजार भगोरिया के रंग में रंगे होते हैं। मेले में हर तरफ फागुन और इन्द्रधनुषी प्रेम के रंग नज़र आते हैं। इन मेलों में मुख्य रूप से होली के लिए खरीददारी करने के लिए लोग आते हैं। गैर जनजातीय समुदाय के लिए भी भगौरिया के साप्ताहिक हाट बाजार विशिष्ट होते हैं। इसका सभी व्यापारियों को भी इंतजार रहता है। इसमें दुकानदार साल भर की कमाई, भगोरिया के साप्ताहिक बाजार से कर लेते हैं। भगोरिया हाट (बाजार) में जरूरत की वस्तुएं, मिठाइयाँ और पारंपरिक आभूषण बिकते हैं।

भगोरिया मेले में बड़े-बड़े ढोल और मांदल की थाप पर पारंपरिक आदिवासी नृत्य किया जाता है, जिसमें विभिन्न दल ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेते हैं। वाद्य यंत्रों के साथ शामिल होने वाले विभिन्न दल एक ही रंग के वस्त्रों में अपनी अलग पहचान के साथ छटा बिखेरते हैं। महिलाओं के साथ पुरूष भी चांदी के आभूषणों से सज्जित होकर पारम्परिक वाद्य यंत्रों की ताल पर थिरकते हैं। चांदी के आभूषण भील जनजाति में समृद्धि के प्रतीक हैं।

भगोरिया मेल-मिलाप, आनंद और उल्लास का उत्सव है। माना जाता है कि इसमें युवा अपनी पसंद के साथी को गुलाल लगाकर या पान खिलाकर अपने प्रेम को अभिव्यक्त करते हैं। भगोरिया में मनपसंद के साथी के साथ भागकर विवाह करने की मान्यता भी प्रचलित है।

भगोरिया पर्व होली के सात दिन पहले से शुरू होकर होलिका दहन तक चलता है। यह मुख्य रूप से मध्यप्रदेश के झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन जिलों के विभिन्न गाँवों में साप्ताहिक बाजार के दिन आयोजित होता है। भगोरिया मेला आदिवासी संस्कृति, उमंग और जीवन को करीब से जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।

वालपुर का प्रसिद्ध भगोरिया

आलीराजपुर जिले के वालपुर का भगोरिया मेला अपनी ऐतिहासिक प्राचीनता, आदिवासी संस्कृति के जीवंत रंगों और अनूठी पारंपरिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है।

किंवदंती है कि इस मेले की शुरुआत राजा भोज के समय में भील राजाओं द्वारा की गई थी। आलीराजपुर जिले के वालपुर में तीन प्रांतों की जनजातीय संस्कृति के रंग दिखाई देते हैं। यह स्थान तीन प्रांतों (मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, और गुजरात के निकट) की सांस्कृतिक संस्कृति का संगम स्थल होने के कारण भी विशेष जाना जाता है। वालपुर का मेला आदिवासी संस्कृति और आधुनिकता का एक अद्भुत मिश्रण है, जहाँ पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों के साथ, ढोल-मांदल की थाप पर आदिवासी युवा थिरकते हैं।

भगोरिया प्रदेश में राजकीय उत्सव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 4 मार्च 2025 को ‘भगोरिया पर्व’ को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जनजातीय देवलोक महोत्सव में राजकीय उत्सव किया। उन्होंने कहा कि भगोरिया उल्लास का पर्व है। यह फागुन के रंगों से सराबोर प्रकृति की खुशबू में कुछ पल थम जाने और इसी में रम जाने का पर्व है। हमारी सरकार भगोरिया का उल्लास बरकरार रखेगी।

वर्ष 2026 में भगोरिया महोत्सव 24 फरवरी मंगलवार से प्रारंभ होगा। यह 2 मार्च सोमवार तक चलेगा। बड़वानी जिले में सोमवार 2 मार्च को निवाली में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भगोरिया महोत्सव में शामिल होंगे।

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