निमाड़ के बारे में
हमारा निमाड़
निमाड़ मध्यप्रदेश के पश्चिमी ओर स्थित है। इसकी भौगोलिक सीमाओं में एक तरफ विंध्याचल पर्वत और दूसरी तरफ सतपुड़ा पर्वत है, जबकि मध्य में नर्मदा नदी का अविरल प्रवाह है। पौराणिक काल में निमाड़ अनूप जनपद कहलाता था। विश्व की प्राचीनतम नदियों में एक नदी नर्मदा का निमाड़ को विशेष आशीर्वाद मिला है। नर्मदा-घाटी सभ्यता का समय खरगौन जिले के महेश्वर में नावड़ा टौड़ी नामक स्थान पर में मिले पुरा साक्ष्यों के आधार पर लगभग ढाई लाख वर्ष माना गया है।
प्रागैतिहासिक काल के आदि मानव की शरणस्थली सतपुड़ा और विंध्याचल रही है। आज भी यहाँ के वन-प्रांतों में जनजातीय समूह निवास करते हैं। नर्मदा तट पर आदि अरण्यवासियों का निमाड़ पुराणों में वर्णित है। उनमें भील, भिलाला, बारेला, गोण्ड, बैगा और कोरकू प्रमुख है।
इतिहासकारों के अनुसार रामायण काल, महाभारत काल, सातवाहन, कनिष्क, अभिरोहर्ष, चालुक्य, भोज, होलकर, सिंधिया, मुगल तथा ब्रिटिश इत्यादि हर काल में निमाड़ की उपस्थिति प्रभावी रही है। विभिन्न कालों में यहाँ जैन, यदुवंशी, सिद्धपंथी, नागपंथी आदि का प्रभाव रहा है। प्राचीन स्थापत्य कला के अवशेष इस क्षेत्र की ऐतिहासिक गाथाओं को आज भी अभिव्यक्त करते है। इस क्षेत्र में प्राप्त पाषाणा कालीन शस्त्रों से भी यह सिद्ध होता है।
अनुमान है कि आर्य एवं अनार्य सभ्यताओं की मिश्रित भूमि होने के कारण यह क्षेत्र “निमार्य” नाम से जाना जाने लगा, जो कि कालांतर में अपभ्रंश होकर “निमार” एवं फिर “निमाड़” में परिवर्तित हो गया। (निमा = आधा)। एक अन्य मतानुसार यह नाम नीम के वृक्षों के कारण पड़ा। इसे निमाड़ की संज्ञा दी गयी। बाद में इसे पूर्वी और पश्चिमी निमाड़ के रूप में जाना जाने लगा।
इतिहास के विभिन्न कालखंडों में यह क्षेत्र-महेश्वर के होलकर, मालवा के परमार, असीरगढ़ के अहीर, माण्डू के मुस्लिम शासक, मुगल तथा पेशवा व अन्य मराठा सरदारों शिंदे, पवार इत्यादि शासकों के साम्राज्य का हिस्सा रहा है। निमाड़ का जिले के रूप में गठन ब्रिटिश राज में हुआ, जिसका प्रशासनिक मुख्यालय खंडवा में था। मुस्लिम शासकों के दिनों में बुरहानपुर प्रशासनिक मुख्यालय हुआ करता था।
एक नवम्बर, 1956 को मध्यप्रदेश राज्य के गठन के साथ ही निमाड़ 2 जिलों, पूर्व निमाड़ और पश्चिम निमाड़ के रूप में अस्तित्व में आया। पूर्व निमाड़ का मुख्यालय खंडवा और पश्चिम निमाड़ का मुख्यालय खरगौन को बनाया गया था।
प्रशासनिक सुदृढ़ता के लिये दिनांक 25 मई, 1998 को “पश्चिम निमाड़” को दो जिलों- खरगौन एवं बड़वानी में एवं 15 अगस्त, 2003 को पूर्व निमाड़ को खंडवा और बुरहानपुर जिलों में विभाजित किया गया। इसके अतिरिक्त निमाड़ को धार जिले की कुक्षी, मनावर और गंधवानी तहसीलों में भी प्रभावी रूप से महसूस किया जा सकता है।
खरगौन
खरगोन जिला 6477 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 5 राजस्व अनुभाग और 10 तहसील हैं। खरगोन में 8 नगरीय निकाय और 600 ग्राम पंचायत हैं। जिले में 1421 ग्राम है। खरगोन में वर्तमान में एक भी नगर निगम नहीं है।
खरगोन जिले की जनसंख्या वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 18 लाख 72 हजार 413 है। इसमें पुरुषों की संख्या 9 लाख 53 हजार 617 और महिलाओं की संख्या 9 लाख 18 हजार 796 है। खरगोन जिले में ग्रामीणों की संख्या 15 लाख 73 हजार 458 और शहरी क्षेत्र में जनसंख्या 2 लाख 98 हजार 955 है। खरगौन जिले में लिंगानुपात 963 है। खरगोन जिले में 8 कृषि उपज मंडी है।
बड़वानी
बड़वानी जिला 5427 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 4 राजस्व अनुभाग और 9 तहसील हैं। बड़वानी में 7 नगरीय निकाय है। इनमें बड़वानी और सेंधवा दो नगर पालिका और 5 नगर पंचायत परिषद है। जिले में 417 ग्राम पंचायत हैं। बड़वानी में 717 ग्राम है, इनमें 597 राजस्व ग्राम और 120 वन ग्राम हैं। बड़वानी में 9 आरआई सर्किल, 397 पटवारी हल्के 15 पुलिस थाने हैं। बड़वानी में 5 कृषि उपज मंडी भी है।
बड़वानी जिले में औसत वर्षा 746.3 मिलीमीटर होती है। यहाँ दिसंबर में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस और मई महीने में अधिकतम तापमान 47 डिग्री तक पहुंच जाता है।
बड़वानी जिले की जनसंख्या वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 13 लाख 85 हजार 881 है। इसमें पुरुषों की संख्या 99 लाख 340 हजार और महिलाओं की संख्या 6 लाख 86 हजार 541 है। बड़वानी जिले में ग्रामीणों की संख्या 11 लाख 81 हजार 812 और शहरी क्षेत्र में जनसंख्या 2 लाख 04 हजार 069 है।
बड़वानी जिले में अनुसूचित जाति की संख्या 87 हजार 991 है जबकि अनुसूचित जनजाति की संख्या 9 लाख 62 हजार 145 है। जिले में जनसंख्या का घनत्व 255 व्यक्ति प्रति किलोमीटर है।
बड़वानी जिले में कुल कामकाजी लोगों की संख्या 6 लाख 53 हजार 897 है। जिले में कुल 2 लाख 53 हजार 478 मुख्य कामकाजी कृषक और 1 लाख 85 हजार 335 मुख्य कामकाजी कृषि श्रमिक है। जिले में 7 लाख 31 हजार 984 गैर श्रमिक की जनसंख्या है।
बड़वानी जिले में 5 लाख 49 हजार 926 लोग साक्षर है। इनमें 3 लाख 13 हजार 642 पुरुष और 2 लाख 36 हजार 284 महिलाएं हैं। जिले में साक्षरता का प्रतिशत 39.68 है।
खण्डवा
खण्डवा जिला 8307 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 4 राजस्व अनुभाग और 5 तहसील हैं। खण्डवा में 5 नगरीय निकाय (एक नगर पालिका निगम एवं 4 नगर पंचायत परिषद) और 422 ग्राम पंचायत हैं। यहाँ पर 710 राजस्व ग्राम और 54 वन ग्राम है। खण्डवा में 175 पटवारी हल्के और 15 पुलिस थाने हैं। खण्डवा जिला मुख्यालय नगर पालिक निगम है। खंडवा जिले में 5 कृषि उपज मंडियां है।
खण्डवा जिले की जनसंख्या वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 13 लाख 10 हजार 061 है। इसमें पुरुषों की संख्या 6 लाख 74 हजार 329 और महिलाओं की संख्या 6 लाख 35 हजार 732 है। खण्डवा जिले में ग्रामीणों की संख्या 10 लाख 50 हजार 625 और शहरी क्षेत्र में जनसंख्या 2 लाख 59 हजार 436 है। खण्डवा जिले में अनुसूचित जाति के लोगों की कुल संख्या एक लाख 56 हजार 602 और अनुसूचित जनजाति के लोगों की कुल संख्या 4 लाख 59 हजार 122 है। खंडवा में 6 लाख 12 हजार 976 कार्यशील जनसंख्या है।
बुरहानपुर
बुरहानपुर जिला 3427 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 2 राजस्व अनुभाग और 5 तहसील हैं। बुरहानपुर में 3 नगरीय निकाय (एक नगर पालिका निगम एवं 1 नगर पालिका और 1 नगर पंचायत परिषद) और 167 ग्राम पंचायत हैं। यहाँ पर 268 राजस्व ग्राम और 37 वन ग्राम है। बुरहानपुर में 95 पटवारी हल्के और 8 पुलिस थाने हैं।बुरहानपुर जिला मुख्यालय नगर पालिक निगम है। जिले में 2 कृषि उपज मंडियां है।
बुरहानपुर जिले की जनसंख्या वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 7 लाख 56 हजार 993 है। इसमें पुरुषों की संख्या 3 लाख 88 हजार 040 और महिलाओं की संख्या 3 लाख 68 हजार 953 है।
बुरहानपुर जिले में ग्रामीणों की कुल संख्या 4 लाख 96 हजार 724 हैं। इनमें पुरुषों की संख्या 2 लाख 54 हजार 470 और महिलाओं की संख्या 2 लाख 42 हजार 254 है।
बुरहानपुर जिले के शहरी क्षेत्र में कुल जनसंख्या 2 लाख 60 हजार 269 है। इनमें पुरुषों की कुल संख्या 1लाख 33 हजार 570 और महिलाओं की संख्या 1 लाख 26 हजार 699 है।
बुरहानपुर जिले में अनुसूचित जाति के लोगों की कुल संख्या 64 हजार 254 (8.48%) और अनुसूचित जनजाति के लोगों की कुल संख्या 2 लाख 30 हजार 095 (30.36%) है। बुरहानपुर में 2 लाख 29 हजार 184 कार्यशील जनसंख्या है।